Latest News     11 से 17 जून पर्यन्त पूज्य श्री श्याम सुन्दर जी पाराशर, वृन्दावन के मुखारबिंद ''श्री वेदलक्षणा गोमहिमा सत्संग सप्ताह'' तथा 21 से 23 जून पर्यंत पूज्य श्री राधाकृष्णजी महाराज के सान्निध्य में गोवत्स पाठशाला का दिव्य आयोजन|    

गो संरक्षण एवं गो चिकित्सा

धन्वन्तरी में गोसेवा का दर्शन जरुर- जरुर करें

श्रीगोधाम महातीर्थ आनन्दवन पथमेड़ा का सबसे महत्वपूर्ण विभाग है ‘‘धनवन्तरी’’ ! गोधाम पहुँचने वाले प्रत्येक अनाश्रित लूले-लंगड़े, अंधे, अपंग, लाचार, दूर्घटनाग्रस्त एवं कत्लखानों में जा रहे छुड़ाए गये गोवंश को सर्वप्रथम यहीं प्रवेश मिलता है। धनवन्तरी में प्राथमिक ‘‘चैकअप व ईलाज’’ पश्चात गोवंश को उनकी शारीरिक स्थिति एवं सेवा-सुरक्षा की आवश्यकता के अनुसार बनायी गयी श्रेणीयों के विभागों में ‘‘रैफर’’ कर दिया जाता है तथा गंभीर रूप से लाचार,बीमार, दूर्घटनाग्रस्त व वृद्ध गोवंश को धनवन्तरी में पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिलने तक रखा जाता है।
‘‘धनवन्तरी’’ में गोमाता की पीड़ा शीघ्रातिशीघ्र दूर कैसे हों, इस हेतु संतवृद, बह्मचारी साधक, पूर्णकालिक गोभक्त-गोसेवकजन और बीमारियों को आधुनिक विज्ञान की भाषा में समझने वाले प्रशिक्षित डाक्टर-कम्पाउडर हर समय हाजिर रहते हैं। यह त्रिस्तरीय व्यवस्था गोमाता की सेवा-सुरक्षा में कहीं चूक

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गो संवर्धन - उन्नत कुलीन सांडों द्वारा संवर्धन

8,000 से 10,000 गायों का उन्नत भारतीय देशी नस्ल के सांडों द्वारा गर्भाधान करवाकर गोसंवर्धन का कार्य

श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के पांच गोसेवाश्रमों श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला- पथमेड़ा, श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ-नन्दगांव, श्रीमहावीर हनुमान गोशालाश्रम-गोलासन, श्रीखेतेश्वर गोशालाश्रम-खिरोड़ी, श्रीठाकुर गोशालाश्रम-पालड़ी तथा श्रीराजाराम गोशालाश्रम-टेटोड़ा सहित जालोर, सिरोही तथा बनासकांठा (गुज.) के गावों में स्थापित दर्जनों गोसंवर्धन केन्द्रों द्वारा प्रतिवर्ष 8,000 से 10,000 गायों का उन्नत भारतीय देशी नस्ल के सांडों द्वारा गर्भाधान करवाकर गोसंवर्धन का कार्य किया जाता है। श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा प्रतिवर्श सैंकड़ों उन्नत नस्ल के नन्दी (सांड) तैयार करके देश के विभिन्न गोग्रामों एवं गोशालाओं को दान करता है तथा गरीब किसानों को प्रतिवर्ष सैंकड़ों जोड़ी सशक्त एवं सुडौल बैल निःशुल्क में उपलब्ध करवाता है। नाकारा सांडो को हजारों की संख्या में गोसेवा केन्द्रों में प्रवेश दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 500 से अधिक गांवो में श्रेष्ठ कुलीन सांड उपलब्ध कराये जा रहे है

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गो पालन

800 से अधिक गांवो में गोपालक किसानों को गो पालन के लिये प्रोत्साहन

श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा द्वारा श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला- पथमेड़ा, श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ-नन्दगांव, श्रीमहावीर हनुमान गोशालाश्रम-गोलासन, श्रीखेतेश्वर गोशालाश्रम-खिरोड़ी, श्रीठाकुर गोशालाश्रम-पालड़ी तथा श्रीराजाराम गोशालाश्रम-टेटोड़ा सहित राजस्थान तथा गुजरात के कई गाँवों में स्थापित गोसेवा आश्रमों में प्रतिवर्ष दस से बारह हजार वेदलक्षणा गोवंश का पालन पोषण करके तैयार किया जाता है। इनकी सेवा में पौष्टिक आहार, हरा चारा, औषधि, स्नान, आदि से प्रेम द्वारा पूर्ण देखभाल की जाती है तथा इनमें से विभिन्न गो प्रजातियों का चयन करके वर्गीकरण होता है। श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा इन वर्गीकृत गो बछड़ियों को संवर्धन हेतु प्रदेश तथा देश के विभिन्न गोशालाओं, गोपालक किसानों तथा गोसेवाश्रमों को सेवा एवं  आजीवन  संरक्षण की शर्त पर निःशुल्क वितरित करता है। साथ ही गुजरात व राजस्थान के 800 गांवो में गोपालक किसानों को प्रोत्साहित कर गोपालन को प्रदेश तथा

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पंचगव्य

पंचगव्य संकलन, अनुसंधान, प्रयोग एवं प्रशिक्षण

पंचगव्य संकलन, अनुसंधान, प्रयोग एवं प्रशिक्षण हेतु: बहुद्देषीय गोसेवा प्रकल्प 

श्रुति-स्मृति प्रतिपादित ब्रह्मर्ष श्रीवशिष्ठ की तपस्थली एवं श्री नन्दिनी गोचारण भूमि अर्बुदारण्य में एक धर्मात्मा गोभक्त द्वारा कामधेनु गुरूकुलम्, संतसेवार्थ प्राप्त 300 बीघा जमीन पर जुलाई सन् 2005 में श्रद्धेय गोऋर्ष श्रीस्वामीजी महाराज के दो माह का चातुर्मास अनुष्ठान किया था। इस चातुर्मास अनुष्ठान की अवधि में ही उपरोक्त जमीन का समतलीकरण तथा वृक्षारोपण का कार्य प्रारम्भ कर दिया था। दिसम्बर सन् 2005 में गीता जयन्ती के पावन पर्व पर आयोजित रा.का.क.म.के अवसर पर श्री गोधाम पथमेड़ा से जुड़े हुए गोभक्तों को अक्षय भूमि दान की अपील की गई। परिणाम स्वरूप सभी गोभक्तों से कुल 2500 बीघा भूमि प्राप्त हुई। इस समय 1200 बीघा भूमि पर वृक्षारोपण भी हो गया।

पूज्य सन्तों की पावन प्रेरणा तथा सत्संकल्प से प्रेरित होकर श्री गोधाम पथमेड़ा

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रचनात्मक गोसेवा महाभियान की प्रेरणा व प्राकट्य

वेदलक्षणा गोवंश के लिये प्राणलेवा भयंकर दुष्काल ईस्वी सन् 1987 से 1993 के मध्य गोरक्षा आन्दोलन का विधेयात्मक (सकारात्मक) स्वरूप देशवासियों के सामने आया। उपरोक्त समयावधि में माँ नर्मदा एवं कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान की प्रेरणा से परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानन्दजी महाराज का राजस्थान की भूमि पर लम्बे अज्ञातकाल के बाद आगमन हुआ। कुछ सत्संगी साधकों द्वारा अगस्त सन् 1992 में एकान्त स्थली के रूप में सांचोर शहर के निकट आनन्दवन पथमेड़ा गोचरभूमि पर स्थित कामधेनु सरोवर के सन्निकट स्थान चयनित किया।

यह आनन्दवन पथमेड़ा भारत देश की वह पावन व मनोरम गोचारण भूमि है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र से द्वारिका जाते समय श्रावण, भादों महिने में रुककर वृन्दावन से लायी हुई भूमण्डल की सर्वाधिक दुधारू, जुझारू, साहसी, शौर्यवान, सौम्यवान, ब्रह्मस्वरूपा वेदलक्षणा गायों के चरने व विचरने के लिए चुना था। यह आनंदवन मारवाड़, काठियावाड़ तथा

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श्री गोधाम पथमेड़ा महातीर्थ

श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा

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